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UPSSSC नक्शानवीस और मानचित्रक परीक्षा: सिलेबस का सरल विश्लेषण

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 नमस्ते! उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा नक्शानवीस (Draftsman) और मानचित्रक (Cartographer) के पदों के लिए जारी किए गए सिलेबस का सरल और सचित्र विश्लेषण यहाँ प्रस्तुत है। UPSSSC नक्शानवीस और मानचित्रक परीक्षा: सिलेबस का सरल विश्लेषण यह विश्लेषण आपको परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट दिशा देगा। 📝 परीक्षा पैटर्न एक नजर में सबसे पहले, परीक्षा की संरचना को समझते हैं:  * कुल प्रश्न: 100  * कुल अंक: 100 (हर प्रश्न 1 अंक का)  * समय: 2 घंटे (120 मिनट)  * प्रश्न का प्रकार: वस्तुनिष्ठ और बहुविकल्पीय (MCQ)  * ❌ नेगेटिव मार्किंग: हाँ, हर गलत उत्तर के लिए 1/4 अंक (25%) काटा जाएगा। 📚 विस्तृत पाठ्यक्रम (Detailed Syllabus) पाठ्यक्रम को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है: भाग-1: विषयगत ज्ञान (कुल 65 अंक) यह भाग आपके ट्रेड या विषय से संबंधित है। इसमें 6 उप-भाग हैं: 1. 📏 ड्राइंग उपकरण और सॉफ्टवेयर (15 अंक)  * ड्राइंग के औजार: ड्राइंग में इस्तेमाल होने वाले औजारों की जानकारी, जैसे- ड्राइंग बोर्ड, ड्राइंग शीट, प्रोटेक्टर, ड्राफ्टिंग मशीन, सेट-स्क्वायर और...

Pooja’s story is more than an invention

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From a village with no electricity or toilets to representing India on the global science stage — 17-year-old Pooja Pal from Barabanki, Uttar Pradesh, is a testament to grit and genius. The daughter of a daily-wage labourer, Pooja’s journey began in Class 8 when she noticed children coughing near a wheat thresher. She didn’t just observe — she acted. Using scrap metal, tin sheets, and a fan, she built a dust-free thresher that filters out harmful agricultural particles. With her teacher’s support, her creation earned national recognition at the INSPIRE Awards. Last month, her innovation took her to Japan — the only student from Uttar Pradesh selected for the prestigious Sakura Science High School Programme, among just 54 from across India. Pooja’s story is more than an invention — it’s a reminder that brilliance can rise from anywhere. All it takes is one question: “What can I do to change this?” — and the courage to answer it. #PoojaBarabanki #SakuraScience #WomenInSTEM #INSPIREAward...

अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी?

  आँधी आई जोर शोर से, डालें टूटी हैं झकोर से। उड़ा घोंसला अंडे फूटे, किससे दुख की बात कहेगी! अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी? हमने खोला आलमारी को, बुला रहे हैं बेचारी को। पर वो चीं-चीं कर्राती है घर में तो वो नहीं रहेगी! घर में पेड़ कहाँ से लाएँ, कैसे यह घोंसला बनाएँ! कैसे फूटे अंडे जोड़े, किससे यह सब बात कहेगी! अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी? - महादेवी वर्मा

"आवा चली महुआ बीनै"

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_____________________ इधर अप्रैल शुरू होते ही चैत की कटिया शुरू हो जाती। उधर महुआ भी चूना शुरू। तो सरसों, चना, मटर, अरहर, अलसी और गेहूं की कटाई-दौंराही-मड़ाई सब घर के बड़े लोगों के ज़िम्मे लेकिन महुआ बीनने का काम हम बच्चों के हिस्से आता। तो फिर भइया लो मजा! संझा से ही प्लानिंग हो जाती। कौन कहाँ, किस पेड़ का महुआ बीनेगा, तय हो जाता। जैसे गाँव में देसी आमों की अलग-अलग वेराइटी, शेप-साइज़, टेस्ट और ख़ुश्बू होती है- वैसे ही महुए की भी अलग-अलग किस्म। हम सब हर पेड़ का महुआ पहचानते। किसी पेड़ का फूल छोटा होता ज़्यादा पीला पन लिए, तो कोई देखने में थोड़ा लंबापन लिए-अंडाकार और रंग चटख सफ़ेदी लिए हुए। महुआ आधी रात से ही, या कहिये सुकऊव्वा तरई के उगने (शुक्र तारा इन्फैक्ट ग्रह जिसे मॉर्निंग स्टार भी कहते हैं-के उदय होने के समय से ही) के साथ ही चूने लगते और लगभग 1 घंटा दिन चढ़ने तक गिरते। छोटे साइज़ वाले ऐसे गिरते- टिप्प टिप्प और बड़े वाले- टप्प टप्प कुछ पानी में भी गिरते - डुब्ब डुब्ब...बुड़ुक बुड़ुक महुआ चूने के पहले ही लोग अपने-अपने हीसा (हिस्से) वाले पेड़ के नीचे उगी हुई घास-झाड़-झाड़ी-झंखाड़ सब साफ...

ग़ुलामी v/s आजादी

ग़ुलामी सलाम करती है,  आजादी सवाल करती है।

जीवन क्या है?

जीवन क्या है, मोबाइल से बचा हुआ टाइम...👽 Blinking DRJ Blogs DRJ Blogs

होगा मेरा भी जलवा - Motivational Poem

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होगा मेरा भी जलवा होगा मेरा भी जलवा,  ये इरादा मैंने ठाना है, मुश्किलों से लड़ते रहना,  यही रास्ता पुराना है। थोड़ी ठोकरें खाई हैं,  पर हौंसला अभी कायम है, हौसलों की इस उड़ान में,  हर मंज़िल को पाना है। रास्ते में कांटे बिछे हैं,  पर कदम नहीं डगमगाएंगे, आंधियों का सामना करके,  हम भी दीप जलाएंगे। जोश है दिल में अब इतना,  कोई ताकत ना रोक सके, मेहनत की इस लौ को,  कोई तूफान ना झोंक सके। देखना, आएगा वो दिन जब,  मेरी पहचान बनेगी, होगा मेरा भी जलवा,  और ये दुनिया देखेगी। हाथों की लकीरों में नहीं,  अब अपने दम पर जीना है, जो सोचा है, जो चाहा है,  वो सब हासिल करना है। होगा मेरा भी जलवा,  हर कदम पर चमकूंगा, जितनी भी हो मुश्किलें,  हर हाल में मैं बहकूंगा। - कमलेश पाल

आखिर क्यूँ बदल जाते हैं दोस्त?

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हर मित्रता के बीच कुछ न कुछ Common होता है... वो उनकी आदत... हो सकती है... अब वो आदत बुरी या अच्छी किसी भी तरह की हो सकती है  दोनों दोस्तों का Career हो सकता है दोनों की एक सी स्थिति हो सकती है...वो किसी भी मायने में हो सकती है  किसी भी मायने को सोचने के तरीके एक से हो सकते हैं... उनकी दयालुता हो सकती है... किसी भी जीव के प्रति दोनों एक सा विचार रखते हैं... पसंद एक सी हो सकती है.... नजरिया एक जैसा हो सकता है...  और भी बहुत कुछ हो सकता है... और जिस दिन ये कॉमन चीज़ बदलती है... Friendship Bonding कमजोर होने लगती है..... इस वजह से बड़ी से बड़ी दोस्ती भी ख़राब हो जाती है... इसलिए कुछ कॉमन चीज़े बचा कर रखना दोस्तों... समय के बदलते बदलते सब कुछ मत बदल देना... कम से कम एक चीज़ बचा के रखना जो दोस्ती का आधार है... मुझे नहीं पता वो क्या है... पर जो भी है उसे संचित रखना! 🙏 मेरे प्रिय मित्रों... रुकिए रुकिए... आप सोच रहे होंगे मैंने एक ख़ास वजह की तो बात ही नहीं की... तो ऐसा नहीं है... हाँ दोस्ती में जब Other Person एंट्री लेता है.. तो वो दूसरे दोस्त की कमियां गिनाना शुर...

अमर शहीद शीतल पाल के बिना अधूरी है आजादी की दास्ताँ।

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     शहीद शीतल पाल (1797-1858) साथियों, अमर शहीद शीतल पाल की बहादुरी की गाथा सुनकर पूरा जिला आज भी गर्व से भर उठता है। ||जयंती - 09 September 1797|| ||पुण्यतिथि -23 February 1858|| 1857 की क्रांति में जब देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी की किरण दिखाई पड़ने लगी तो राष्ट्रीय समाज के लोगों ने हथियार उठाने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई थी।  अंग्रेजो के दांत खट्टे कर देश के प्रति कुछ भी कर गुजरने का संदेश दिया था।  इसी तरह भदोही जिले में राष्ट्रीय समाज से आने वाले शीतल पाल ने भी उस दौर में ऐसे ही साहस का परिचय देते हुए घोड़े से भाग रहे क्रूर अंग्रेज अफसर विलियम रिचर्ड मूर को अपनी (भेड़ो के लिए पत्ते काटने वाला हथियार) लग्गी (कटवांसी) से जमीन पर गिरा दिया था और मूर का सिर कलम कर दिया।  इस घटना के बाद अंग्रेजों ने शीतल पाल को गिरफ्तार कर फांसी दे दी। फांसी मिलने के बाद शीतल पाल हमेशा के लिए अमर हो गए।  उनके साहस और बलिदान को लोग आज भी गर्व से याद करते है। दरअसल 1857 की क्रांति के दौरान भदोही में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा किसानों के खेतों पर जबरन करा...

जंगल का सुकूं

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किसी जंगल को भी सुकून मिलता होगा शहर को जलते देखकर, कि उन्हें जलाकर कभी शहर बनाए गए थे..! 💔 - बड़े साहब 

उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी

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उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी Read full article here

Examination Plan and Syllabus of written examination for selection on vacant posts of direct recruitment of UPSSSC Draftsman and Cartographer

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Examination Plan and Syllabus of written examination for selection on vacant posts of UPSSSC direct recruitment of Draftsman and Cartographer There will be one question paper in the written examination, which will contain 100 questions and the total time duration will be two hours. The questions of the examination will be objective and multiple-choice type. Each question will be of one mark. There is a provision of negative marking for each wrong answer for the examination, which will be 25 percent i.e. ½ of the marks prescribed for that question. Examination Plan The parts of examination, subject, number of questions, total marks and time period will be as per the details given below-      Part Subject No. of Questions Total Marks  Time Period Part-1 1.- Drawing Instrument and Software 15 15 2. Calculation and I...

भारत की अति पिछड़ी जातियां एवं उनकी वर्तमान स्थिति एवं सुधार।

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अति पिछड़ी जातियों की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन उनकी समस्याएं अभी भी व्यापक हैं। सामाजिक भेदभाव, आर्थिक असमानता, और शिक्षा की कमी उनके जीवन को प्रभावित करती हैं। सरकारी प्रयासों के बावजूद, उन्हें समग्र विकास की ओर ले जाने के लिए अधिक समर्पित नीतियों और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है। भारत में अति पिछड़ी जातियों (Extremely Backward Classes - EBCs) की स्थिति ऐतिहासिक, सामाजिक, और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण रही है। हालांकि, समय के साथ विभिन्न सरकारों ने उनके उत्थान के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन फिर भी कई समस्याएं बरकरार हैं।    1. सामाजिक स्थिति: भेदभाव: भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव की लंबी परंपरा रही है, और अति पिछड़ी जातियों को विशेष रूप से सामाजिक असमानताओं का सामना करना पड़ता है। कई ग्रामीण इलाकों में उन्हें अभी भी ऊँची जातियों द्वारा भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सामाजिक बहिष्कार: इन्हें कई बार गांवों में सार्वजनिक स्थलों पर या धार्मिक आयोजनों में भाग लेने से वंचित किया जाता है। 2. आर्थिक स्थिति: गरीबी: अधिकांश अति पिछड़ी जातियां गरीब हैं और उनके पास...

एक देश बारह दुनिया - शिरीष खरे (हाशिये पर छूटे भारत की तस्वीर)

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   जीवनका सफ़र एन. एम.  एक देश बारह दुनिया - शिरीष खरे (हाशिये पर छूटे भारत की तस्वीर) वास्तव में एक ऐसी पुस्तक है जिसके माध्यम से भारत की वह तस्वीर देखने को मिलती है जो आज की चमक-दमक के नीचे दब चुकी है और वर्तमान में गिरते पत्रकारिता के स्तर मे कहीं-न-कहीं छुपा दी जाती है। वर्तमान में पत्रकार किसी मेगासिटी, किसी नदी पर बने बांध, थर्मल पॉवर प्लांट और विकासशील भारत की तो बात करते है, लेकिन मेगासिटी के कारण विस्थापित लोगों के दर्द ,संघर्ष और उनके साथ हो रहे अन्याय-शोषण की  बात करना भूल जाते है। वहीं, शिरीष खरे सर की पुस्तक उन सब के दर्द को दिखाती है, साथ ही एक गांधीवादी की बात भी करती है, जो गांव में बसे हैं और  थर्मल पॉवर प्लांट एवं बने बांधो से पर्यावरण पड़ रहे प्रभाव की बात कर रहे हैं। कम शब्दों में कहूं तो यह पुस्तक सामाजिक, मानवता, आर्थिक, राजनीति और भूगोल की दृष्टि से भारत की ऐसी तस्वीर सामने लाती है जो हमारी कल्पना से भी दूर है...। शिरीष खरे सर की साहस एवं जज्बे को तहेदिल से शुक्रिया जिन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से हमें ऐसी दुनिया से रूबरू कराया जो हमारी सो...

मुझे उतनी दूर मत ब्याहना - निर्मला पुतुल

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बाबा! मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हे मत ब्याहना उस देश में जहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते हों जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँ वहाँ मत कर आना मेरा लगन वहाँ तो कतई नही जहाँ की सड़कों पर मान से भी ज़्यादा तेज़ दौड़ती हों मोटर-गाडियाँ ऊँचे-ऊँचे मकान और दुकानें हों बड़ी-बड़ी उस घर से मत जोड़ना मेरा रिश्ता जिस घर में बड़ा-सा खुला आँगन न हो मुर्गे की बाँग पर जहाँ होती ना हो सुबह और शाम पिछवाडे से जहाँ पहाडी पर डूबता सूरज ना दिखे। मत चुनना ऐसा वर जो पोचाई और हंडिया में डूबा रहता हो अक्सर काहिल निकम्मा हो माहिर हो मेले से लड़कियाँ उड़ा ले जाने में ऐसा वर मत चुनना मेरी ख़ातिर कोई थारी लोटा तो नहीं कि बाद में जब चाहूँगी बदल लूँगी अच्छा-ख़राब होने पर जो बात-बात में बात करे लाठी-डंडे की निकाले तीर-धनुष कुल्हाडी जब चाहे चला जाए बंगाल, आसाम, कश्मीर ऐसा वर नहीं चाहिए मुझे और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाया फसलें नहीं उगाई जिन हाथों ने जिन हाथों ने नहीं दिया कभी ...

एक ऐसा भारतीय शासक जिसने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।

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 एक ऐसा भारतीय शासक जिसने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। इकलौता ऐसा शासक, जिसका खौफ अंग्रेजों में साफ-साफ दिखता था। एकमात्र ऐसा शासक जिसके साथ अंग्रेज हर हाल में बिना शर्त समझौता करने को तैयार थे। एक ऐसा शासक, जिसे अपनों ने ही बार-बार धोखा दिया, फिर भी जंग के मैदान में कभी हिम्मत नहीं हारी। इतना महान था वो भारतीय शासक, फिर भी इतिहास के पन्नों में वो कहीं खोया हुआ है। उसके बारे में आज भी बहुत लोगों को जानकारी नहीं है। उसका नाम आज भी लोगों के लिए अनजान है। उस महान शासक का नाम है - यशवंतराव होलकर। यह उस महान वीरयोद्धा का नाम है, जिसकी तुलना विख्यात इतिहास शास्त्री एन एस इनामदार ने 'नेपोलियन' से की है। पश्चिम मध्यप्रदेश की मालवा रियासत के महाराज यशवंतराव होलकर का भारत की आजादी के लिए किया गया योगदान महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से कहीं कम नहीं है। यशवतंराव होलकर का जन्म 1776 ई. में हुआ। इनके पिता थे - तुकोजीराव होलकर। होलकर साम्राज्य के बढ़ते प्रभाव के कारण ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया ने यशवंतराव के बड़े भाई मल्हारराव को मौत की नींद...

शहादत पर लगा दी थी वादों की झड़ी, सालभर बाद भी सिर्फ इंतजार

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  शहादत पर लगा दी थी वादों की झड़ी, सालभर बाद भी सिर्फ इंतजार           आज है शहादत दिवस - 29 जुलाई  गड़वारा सेना की 268. इंजीनियरिंग रेजीमेंट के जवान रितेश पाल भारत माता की सीमा की रक्षा करते हुए एक साल पहले शहीद हो गए थे। शव उनके घर पहुंचा तो जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के साथ पूरा जिला उमड़ पड़ा था। लोगों ने वादों की झड़ी लगा दी। हालांकि एक साल बाद भी इन वादों के पूरे होने का इंतजार परिजनों को है। वर्ष 2010 में सेना में भर्ती हुए अंतू के पूरे भैया निवासी मूलचंद पाल के पुत्र रितेश (32) पिछले साल मनाली में तैनात थे। 29 जुलाई 2021 को वह जेसीबी से बर्फ हटा रहे थे। तभी उन पर बर्फ का पहाड़ गिर पड़ा और वह शहीद हो गए। 31 जुलाई की रात उनका शव घर आया तो पहली अगस्त को  अंतिम संस्कार में पूरा जिला उमड़ पड़ा भारी बारिश के बीच अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ और देश भक्ति के नारों से इलाका गूंज उठा था। नेताओं ने भी वादों की झड़ी लगा दी थी। शहीद स्मारक, द्वार के साथ ही एक सड़क रितेश के नाम पर करने का ऐलान किया गया था। शहीद की पत्नी सुशीला को 35 लाख और माता-पिता को 1...

विश्व कैंसर दिवस 2022: इतिहास से लेकर मिथकों तक, वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

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  विश्व कैंसर दिवस 2022 की थीम 'क्लोज द केयर गैप' है। यहां हम कुछ मिथकों को दूर करेंगे और इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण विवरण साझा करेंगे। दुनिया हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाती है, जिसका उद्देश्य जागरूकता पैदा करना और एक जानलेवा बीमारी - 'कैंसर' के वैश्विक प्रभाव को कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर से जुड़े कई मिथक और पूर्वाग्रह हैं। यहां हम कुछ मिथकों को दूर करेंगे और इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण विवरण भी साझा करेंगे। कैंसर क्या है? कैंसर को असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो शरीर में कहीं भी हो सकती हैं। इन असामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं, घातक कोशिकाओं या यहां तक ​​कि ट्यूमर कोशिकाओं के रूप में जाना जाता है। कैंसर के बारे में मिथक रोगी के तनाव को बढ़ाते हैं और उन्हें समय पर उपचार लेने से भी रोकते हैं। विश्व कैंसर दिवस 2022 का विषय क्या है? इस वर्ष के विश्व कैंसर दिवस की थीम 'क्लोज द केयर गैप' है। यह विषय दुनिया भर में कैंसर देखभाल में असमानताओं को समझने और कम करने की आवश्यकता पर बल...

भारतीय विचारक: स्वामी विवेकानंद (1863-1902)

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स्वामी विवेकानंद के बारे में स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ तथा उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। वह रामकृष्ण परमहंस के एक मुख्य शिष्य और भिक्षु थे। उन्होंने वेदांत और योग के भारतीय दर्शन का परिचय पश्चिमी दुनिया को कराया। वेदांत दर्शन: वेदांत दर्शन उपनिषद् पर आधारित है तथा इसमें उपनिषद् की व्याख्या की गई है। वेदांत दर्शन में ब्रह्म की अवधारणा पर बल दिया गया है, जो उपनिषद् का केंद्रीय तत्त्व है। इसमें वेद को ज्ञान का परम स्रोत माना गया है, जिस पर प्रश्न खड़ा नहीं किया जा सकता। वेदांत में संसार से मुक्ति के लिये त्याग के स्थान पर ज्ञान के पथ को आवश्यक माना गया है और ज्ञान का अंतिम उद्देश्य संसार से मुक्ति के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति है। वर्ष 1897 में विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के पश्चात् रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन ने भारत में शिक्षा और लोकोपकारी कार्यों जैसे- आपदाओं में सहायता, चिकित्सा सुविधा, प्राथमिक और उच्च शिक्षा तथा जनजातियों के कल्याण पर बल दिया। स्वामी विवेकानंद के दर्शन की मूल बातें- विवेकानंद का विचार है कि सभी धर्म एक ही लक...

बेईमान कोटेदारों की तो खैर नहीं

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  दोस्तों, यदि आप देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और online माध्यम से कोटेदार के खिलाफ शिकायत करना चाहते हैं, तो आप यहाँ बताये जा रहे आसान सी प्रक्रिया को फॉलो करें। आप बड़ी सरलता से ऑनलाइन कोटेदार के खिलाफ शिकायत कर सकतें हैं – सबसे पहले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की official website https://fcs.up.gov.in/FoodPortal.aspx पर click करें। यहाँ क्लीक करके डायरेक्ट जा सकते हैं। इसके बाद आपके सामने जो पेज खुलेगा, उस पर सबसे नीचे दिए गए महत्वपूर्ण लिंक सेक्शन में ऑनलाइन शिकायत प्रेक्षित करें option पर click करें।  इसके बाद आप खुद ही बाप हैं 😄😜😜 क्यूंकि अब मेरा लिखने का मन नहीं कर रहा...... 🙃🤠 जी हां अगर आपको ऑनलाइन कोटेदार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में परेशानी आ रही है, तो आप खाद एवं आपूर्ति विभाग के द्वारा जारी किए गए 1967 या 18001800150 toll free नंबर पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं।