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मुझे उतनी दूर मत ब्याहना - निर्मला पुतुल

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बाबा! मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हे मत ब्याहना उस देश में जहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते हों जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँ वहाँ मत कर आना मेरा लगन वहाँ तो कतई नही जहाँ की सड़कों पर मान से भी ज़्यादा तेज़ दौड़ती हों मोटर-गाडियाँ ऊँचे-ऊँचे मकान और दुकानें हों बड़ी-बड़ी उस घर से मत जोड़ना मेरा रिश्ता जिस घर में बड़ा-सा खुला आँगन न हो मुर्गे की बाँग पर जहाँ होती ना हो सुबह और शाम पिछवाडे से जहाँ पहाडी पर डूबता सूरज ना दिखे। मत चुनना ऐसा वर जो पोचाई और हंडिया में डूबा रहता हो अक्सर काहिल निकम्मा हो माहिर हो मेले से लड़कियाँ उड़ा ले जाने में ऐसा वर मत चुनना मेरी ख़ातिर कोई थारी लोटा तो नहीं कि बाद में जब चाहूँगी बदल लूँगी अच्छा-ख़राब होने पर जो बात-बात में बात करे लाठी-डंडे की निकाले तीर-धनुष कुल्हाडी जब चाहे चला जाए बंगाल, आसाम, कश्मीर ऐसा वर नहीं चाहिए मुझे और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाया फसलें नहीं उगाई जिन हाथों ने जिन हाथों ने नहीं दिया कभी ...

एक ऐसा भारतीय शासक जिसने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।

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 एक ऐसा भारतीय शासक जिसने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। इकलौता ऐसा शासक, जिसका खौफ अंग्रेजों में साफ-साफ दिखता था। एकमात्र ऐसा शासक जिसके साथ अंग्रेज हर हाल में बिना शर्त समझौता करने को तैयार थे। एक ऐसा शासक, जिसे अपनों ने ही बार-बार धोखा दिया, फिर भी जंग के मैदान में कभी हिम्मत नहीं हारी। इतना महान था वो भारतीय शासक, फिर भी इतिहास के पन्नों में वो कहीं खोया हुआ है। उसके बारे में आज भी बहुत लोगों को जानकारी नहीं है। उसका नाम आज भी लोगों के लिए अनजान है। उस महान शासक का नाम है - यशवंतराव होलकर। यह उस महान वीरयोद्धा का नाम है, जिसकी तुलना विख्यात इतिहास शास्त्री एन एस इनामदार ने 'नेपोलियन' से की है। पश्चिम मध्यप्रदेश की मालवा रियासत के महाराज यशवंतराव होलकर का भारत की आजादी के लिए किया गया योगदान महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से कहीं कम नहीं है। यशवतंराव होलकर का जन्म 1776 ई. में हुआ। इनके पिता थे - तुकोजीराव होलकर। होलकर साम्राज्य के बढ़ते प्रभाव के कारण ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया ने यशवंतराव के बड़े भाई मल्हारराव को मौत की नींद...

शहादत पर लगा दी थी वादों की झड़ी, सालभर बाद भी सिर्फ इंतजार

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  शहादत पर लगा दी थी वादों की झड़ी, सालभर बाद भी सिर्फ इंतजार           आज है शहादत दिवस - 29 जुलाई  गड़वारा सेना की 268. इंजीनियरिंग रेजीमेंट के जवान रितेश पाल भारत माता की सीमा की रक्षा करते हुए एक साल पहले शहीद हो गए थे। शव उनके घर पहुंचा तो जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के साथ पूरा जिला उमड़ पड़ा था। लोगों ने वादों की झड़ी लगा दी। हालांकि एक साल बाद भी इन वादों के पूरे होने का इंतजार परिजनों को है। वर्ष 2010 में सेना में भर्ती हुए अंतू के पूरे भैया निवासी मूलचंद पाल के पुत्र रितेश (32) पिछले साल मनाली में तैनात थे। 29 जुलाई 2021 को वह जेसीबी से बर्फ हटा रहे थे। तभी उन पर बर्फ का पहाड़ गिर पड़ा और वह शहीद हो गए। 31 जुलाई की रात उनका शव घर आया तो पहली अगस्त को  अंतिम संस्कार में पूरा जिला उमड़ पड़ा भारी बारिश के बीच अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ और देश भक्ति के नारों से इलाका गूंज उठा था। नेताओं ने भी वादों की झड़ी लगा दी थी। शहीद स्मारक, द्वार के साथ ही एक सड़क रितेश के नाम पर करने का ऐलान किया गया था। शहीद की पत्नी सुशीला को 35 लाख और माता-पिता को 1...

विश्व कैंसर दिवस 2022: इतिहास से लेकर मिथकों तक, वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

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  विश्व कैंसर दिवस 2022 की थीम 'क्लोज द केयर गैप' है। यहां हम कुछ मिथकों को दूर करेंगे और इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण विवरण साझा करेंगे। दुनिया हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाती है, जिसका उद्देश्य जागरूकता पैदा करना और एक जानलेवा बीमारी - 'कैंसर' के वैश्विक प्रभाव को कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर से जुड़े कई मिथक और पूर्वाग्रह हैं। यहां हम कुछ मिथकों को दूर करेंगे और इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण विवरण भी साझा करेंगे। कैंसर क्या है? कैंसर को असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो शरीर में कहीं भी हो सकती हैं। इन असामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं, घातक कोशिकाओं या यहां तक ​​कि ट्यूमर कोशिकाओं के रूप में जाना जाता है। कैंसर के बारे में मिथक रोगी के तनाव को बढ़ाते हैं और उन्हें समय पर उपचार लेने से भी रोकते हैं। विश्व कैंसर दिवस 2022 का विषय क्या है? इस वर्ष के विश्व कैंसर दिवस की थीम 'क्लोज द केयर गैप' है। यह विषय दुनिया भर में कैंसर देखभाल में असमानताओं को समझने और कम करने की आवश्यकता पर बल...

भारतीय विचारक: स्वामी विवेकानंद (1863-1902)

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स्वामी विवेकानंद के बारे में स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ तथा उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। वह रामकृष्ण परमहंस के एक मुख्य शिष्य और भिक्षु थे। उन्होंने वेदांत और योग के भारतीय दर्शन का परिचय पश्चिमी दुनिया को कराया। वेदांत दर्शन: वेदांत दर्शन उपनिषद् पर आधारित है तथा इसमें उपनिषद् की व्याख्या की गई है। वेदांत दर्शन में ब्रह्म की अवधारणा पर बल दिया गया है, जो उपनिषद् का केंद्रीय तत्त्व है। इसमें वेद को ज्ञान का परम स्रोत माना गया है, जिस पर प्रश्न खड़ा नहीं किया जा सकता। वेदांत में संसार से मुक्ति के लिये त्याग के स्थान पर ज्ञान के पथ को आवश्यक माना गया है और ज्ञान का अंतिम उद्देश्य संसार से मुक्ति के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति है। वर्ष 1897 में विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के पश्चात् रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन ने भारत में शिक्षा और लोकोपकारी कार्यों जैसे- आपदाओं में सहायता, चिकित्सा सुविधा, प्राथमिक और उच्च शिक्षा तथा जनजातियों के कल्याण पर बल दिया। स्वामी विवेकानंद के दर्शन की मूल बातें- विवेकानंद का विचार है कि सभी धर्म एक ही लक...

बेईमान कोटेदारों की तो खैर नहीं

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  दोस्तों, यदि आप देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और online माध्यम से कोटेदार के खिलाफ शिकायत करना चाहते हैं, तो आप यहाँ बताये जा रहे आसान सी प्रक्रिया को फॉलो करें। आप बड़ी सरलता से ऑनलाइन कोटेदार के खिलाफ शिकायत कर सकतें हैं – सबसे पहले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की official website https://fcs.up.gov.in/FoodPortal.aspx पर click करें। यहाँ क्लीक करके डायरेक्ट जा सकते हैं। इसके बाद आपके सामने जो पेज खुलेगा, उस पर सबसे नीचे दिए गए महत्वपूर्ण लिंक सेक्शन में ऑनलाइन शिकायत प्रेक्षित करें option पर click करें।  इसके बाद आप खुद ही बाप हैं 😄😜😜 क्यूंकि अब मेरा लिखने का मन नहीं कर रहा...... 🙃🤠 जी हां अगर आपको ऑनलाइन कोटेदार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में परेशानी आ रही है, तो आप खाद एवं आपूर्ति विभाग के द्वारा जारी किए गए 1967 या 18001800150 toll free नंबर पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं।

National Farmers Day | 23 December

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National Farmers Day is celebrated every year, especially in those states which are actively engaged in farming, such as Uttar Pradesh, Punjab, Haryana, Madhya Pradesh, among others. Farmers are the backbone of society. They are the ones who work around the clock and all the year to ensure that people don't starve and die of hunger, but they themselves struggle for 2 square meals a day. Therefore, to promote awareness, to help and reward farmers for their contribution to society, Farmers day is celebrated every year. Chaudhary Charan Singh, the Kisan Leader once said, "The true India resides in its villages." Watch YouTube Shorts National Farmers Day